Indian Rupee hits record low—भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले ₹91.64 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले रुपया करीब 3 पैसे कमजोर हुआ। वहीं बीते एक सप्ताह में रुपये में 64 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है। महीने की शुरुआत से अब तक कुल मिलाकर रुपया ₹1.64 तक टूट चुका है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि Indian Rupee hits record low का ट्रेंड फिलहाल कमजोर ही बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी निकासी मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी 2026 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹33,598 करोड़ की निकासी की है।
इस पूंजी निकासी के चलते बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे रुपये पर दबाव और गहरा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी इस तरह की बड़ी बिकवाली होती है, तो अक्सर Indian Rupee hits record low जैसी स्थिति देखने को मिलती है।
वैश्विक कारणों ने भी बढ़ाई कमजोरी
घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी रुपये को कमजोर किया है। भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में देरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिका और ग्रीनलैंड से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव भी डॉलर को मजबूती दे रहा है।
आयातकों और कॉरपोरेट कंपनियों ने भी लंबे वीकेंड और आगामी केंद्रीय बजट से पहले डॉलर की खरीद तेज कर दी, जिससे बाजार में यह धारणा और मजबूत हुई कि Indian Rupee hits record low का दबाव फिलहाल बना रह सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, आयातकों और कॉरपोरेट्स की ओर से बढ़ी डॉलर मांग और घरेलू शेयर बाजार में आई ताजा गिरावट ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा दिया है।
उनका मानना है कि डॉलर-रुपया विनिमय दर में मजबूती बनी रह सकती है और आने वाले समय में यह 92 के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी छू सकती है। ऐसे में बाजार में यह चर्चा तेज है कि Indian Rupee hits record low अभी अंतिम स्तर नहीं हो सकता।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले दिनों में रुपये की चाल इन कारकों पर निर्भर करेगी:
- विदेशी निवेशकों की खरीद–बिक्री
- वैश्विक डॉलर इंडेक्स की स्थिति
- केंद्रीय बजट से जुड़े संकेत
- भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति
जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक रुपये में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
